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मंथन

मंथन


 📖 हमारे चार वेद है।

1] ऋग्वेद

2] सामवेद

3] अथर्ववेद

4] यजुर्वेद

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📜 कुल 6 शास्त्र है।

1] वेदांग

2] सांख्य

3] निरूक्त

4] व्याकरण

5] योग

6] छंद

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⛲ हमारी 7 नदियां।

1] गंगा

2] यमुना

3] गोदावरी

4] सरस्वती

5] नर्मदा

6] सिंधु

7] कावेरी

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📚 हमारे 18 पुराण।

1] मत्स्य पुराण

2] मार्कण्डेय पुराण

3] भविष्य पुराण

4] भगवत पुराण

5] ब्रह्मांड पुराण

6] ब्रह्मवैवर्त पुराण

7] ब्रह्म पुराण

8] वामन पुराण

9] वराह पुराण

10] विष्णु पुराण

11] वायु पुराण

12] अग्नि पुराण

13] नारद पुराण

14] पद्म पुराण

15] लिंग पुराण

16] गरुड़ पुराण

17] कूर्म पुराण

18] स्कंद पुराण

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🍚 पंचामृत।

1] दूध

2] दहीं

3] घी

4] मध

5] साकर

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🌌 पंचतत्व।

1] पृथ्वी

2] जल

3] तेज

4] वायु

5] आकाश

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☘ तीन गुण।

1] सत्व्

2] रज्

3] तम्

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🌀 तीन दोष।

1] वात्

2] पित्त्

3] कफ

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🌁 तीन लोक।

1] आकाश लोक

2] मृत्यु लोक

3] पाताल लोक

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🌊 सात महासागर।

1] क्षीरसागर

2] दधिसागर

3] घृतसागर

4] मथानसागर

5] मधुसागर

6] मदिरासागर

7] लवणसागर

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🌅 सात द्वीप।

1] जम्बू द्वीप

2] पलक्ष द्वीप

3] कुश द्वीप

4] पुष्कर द्वीप

5] शंकर द्वीप

6] कांच द्वीप

7] शालमाली द्वीप

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🗿 तीन देव।

 1] ब्रह्मा

 2] विष्णु

 3] महेश

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🐋🐄🐍 तीन जीव।

1] जलचर

2] नभचर

3] थलचर

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👴👨👦👳 चार वर्ण।

1] ब्राह्मण

2] क्षत्रिय

3] वैश्य

4] शूद्र

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🚩 चार फल (पुरुषार्थ)।

1] धर्म

2] अर्थ

3] काम

4] मोक्ष

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👺 चार शत्रु।

1] काम

2] क्रोध 

3] मोह

4] लोभ

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🏡 चार आश्रम।

1] ब्रह्मचर्य

2] गृहस्थ

3] वानप्रस्थ

4] संन्यास

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💎 अष्टधातु।

1] सोना

2] चांदी

3] तांबु

4] लोह

5] सीसु

6] कांस्य

7] पित्तल

8] रांगु

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👥 पंचदेव।

1] ब्रह्मा

2] विष्णु

3] महेश

4] गणेश

5] सूर्य

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👁 चौदह रत्न।

1] अमृत

2] अैरावत हाथी

3] कल्पवृक्ष

4] कौस्तुभ मणी

5] उच्चै:श्रवा अश्व

6] पांचजन्य शंख

7] चंद्रमा

8] धनुष

9] कामधेनु गाय

10] धनवंतरी

11] रंभा अप्सरा

12] लक्ष्मी माताजी 

13] वारुणी

14] वृष

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🌹🙏🏻  नवधा भक्ति।

1] श्रवण

2] कीर्तन

3] स्मरण

4] पादसेवन

5] अर्चना

6] वंदना

7] मित्र

8] दास्य

9] आत्मनिवेदन

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🌍 चौदह भुवन।

1] तल

2] अतल

3] वितल

4] सुतल

5] रसातल

6] पाताल

7] भुवलोक

8] भुलोक

9] स्वर्ग

10] मृत्युलोक

11] यमलोक

12] वरुणलोक

13] सत्यलोक

14] ब्रह्मलोक.

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रत्न क्या कर सकता है ?

  रत्न:-   सबसे पहले हम जान लेते हैं कि रत्न क्या है? काम क्या करता है?  क्या रत्न अशुभ / नीच ग्रह को शुभ कर सकता है ? रत्नों का सिर्फ काम है ग्रह की ताकत / प्रभाव को बढ़ाना ।  जो भी ग्रह है उस ग्रह की ताकत, उस ग्रह के प्रभाव को बढ़ाना। अच्छे ग्रह हैं तो अच्छे ग्रह की ताकत को बढ़ाएगा और अगर कुंडली में वह ग्रह खराब स्थिति में है तो भी वह उसके प्रभाव को बढ़ाएगा। जो ग्रह हमारे कुंडली में अच्छे भाव में है अगर हम उनके रत्न पहनते हैं तो वह उसके प्रभाव को बढ़ाएगा जो हमें फायदा देगा।  जो ग्रह हमारे कुंडली में अशुभ / नीच में है खराब है तो रत्न शुभ नहीं कर सकता है बल्कि अगर उसके रत्न धारण करेंगे तो वह रत्न उसके प्रभाव को बढ़ाएगा और नीच / अशुभ होने के कारण वह ग्रह हमें परेशान करेंगे।  रत्न हमेशा शुभ / योगकारक / कमजोर ग्रह के ही धारण करने चाहिए। जो ग्रह कुंडली में शुभ हो लेकिन उसमें बल की कमी हो तो उससे संबंधित रत्न को धारण करना चाहिए।  जो ग्रह कुंडली में शुभ हो और बलवान हो तो उसके रत्न को धारण नहीं करना चाहिए, क्योंकि बलवान ग्रह का रत्न धारण करने से वह अशुभ ...

33 कोटि देवी देवता के नाम

  12 आदित्य, 8 वसु, 11 रुद्र और इन्द्र व प्रजापति को मिलाकर कुल 33 देवता होते हैं। कुछ विद्वान इन्द्र और प्रजापति की जगह 2 अश्विनी कुमारों को रखते हैं। प्रजापति ही ब्रह्मा हैं। 12 आदित्य : 1. अंशुमान, 2. अर्यमा, 3. इन्द्र, 4. त्वष्टा, 5. धाता, 6. पर्जन्य, 7. पूषा, 8. भग, 9. मित्र, 10. वरुण, 11. विवस्वान और 12. विष्णु। 8 वसु : 1. अप, 2. ध्रुव, 3. सोम, 4. धर, 5. अनिल, 6. अनल, 7. प्रत्यूष और 8. प्रभाष। 11 रुद्र : 1. शम्भू, 2. पिनाकी, 3. गिरीश, 4. स्थाणु, 5. भर्ग, 6. भव, 7. सदाशिव, 8. शिव, 9. हर, 10. शर्व और 11. कपाली। 2 अश्विनी कुमार : 1. नासत्य और 2. दस्त्र। कुल : 12+8+11+2=33

ग्रहों का स्वभाव , फल , रोग और कारक तत्व

  ग्रहों का स्वभाव , फल , रोग और कारकत्व* सूर्य। आकाश मंडल का मुख्य केंद्र, सभी ग्रह इसी के प्रकाश से प्रकाशमय होते है। सबसे ज्यादा बलवान और पराक्रमी ग्रह। कारक : आत्मा. पिता, नेत्र, पराक्रम, तेज़, माणिक्य, राजा, शासनादी, हड्डीयों, पेट एवं हृदय। कुंडली में १, ९, १० भाव का कारक। विचार : शारीरिक गठन, शक्ति, पिता, वैध, उच्च वर्ग, प्रतिष्ठा, ग्रीष्म ऋतु, सोना, तांबा, शरीर का सुख। पित प्रकृति, सतोगुण,अग्नि – तत्व, पुरुष जाति, पूर्व दिशा का स्वामी, दिन में बली। मेष राशि में १० अंश उच्च एवं तुला राशि में १० अंश नीच। रत्न : प्रिय रत्न माणिक्य, क्षत्रिय जाति का ग्रह। रोग : रक्त, पित विकार, सिर दर्द, नेत्र रोग, ज्वर, ह्रदय रोग, अतिसार, पेट की बीमारी व हड्डियों का रोग, व्याकुलता । चंद्रमा मन के उपर प्रभाव, कुण्डली में चंद्रमा खराब होने पर मन और पाँचो इन्द्रियों पर प्रभाव। सूर्य से प्रकाश मिलने पर ही चमकता है, पूर्ण रूपसे पृथ्वी पर प्रभाव। तीव्र गति से घुमने वाला ग्रह ।सवा दो दिन एक राशी में भ्रमण , मन की संकल्प शक्ति चंद्रमा से प्रभावित। कारक : मन, बुद्धि, माता, धन, खूबसूरती, चावल, सफेद रंगो क...