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जीरा (Cumin seeds)

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-: जीरा के फायदे और औषधीय गुण :- आप सब्जी खाते हैं , तो जीरा के बारे में जरूर जानते होंगे। जब भी कोई सब्जी बनाई जाती है , तो सबसे पहले जीरा का छौंक ही लगाया जाता है। जीरा का प्रयोग सब्जी में किया जाता है। जीरा के प्रयोग से कई बीमारियों का उपचार भी किया जा सकता है। आयुर्वेद में जीरा को एक बहुत ही फायदेमंद औषधि बताया गया है , और यह भी बताया गया है कि , कैसे जीरा का सेवन कर अनेक रोगों की रोकथाम करने में मदद मिल सकती है। जीरा क्या है ?  जीरा एक मसाला है। आयुर्वेद के अनुसार , जीरा तीन तरह का होता है :- काला जीरा सफेद जीरा अरण्य जीरा (जंगली जीरा) सफेद जीरा से सभी लोग परिचित हैं , क्योंकि इसका प्रयोग मसाले के रूप में किया जाता है।   -: जीरा के फायदे और उपयोग:-  मुंह से बदबू आने पर जीरा का प्रयोग :- जीरा , तथा सेंधा नमक के चूर्ण का दिन में दो बार सेवन करें। इससे   मुंह से आने वाली बदबू   ठीक होती है। मतली और उल्टी में जीरा के प्रयोग से फायदा :- मतली , और   उल्टी की परेशानी   में जीरे को रेशमी कपड़े में लपेट लें। इसकी बत्ती बना लें , और इसका धुआं नाक में सूंघें। इससे फायदा होता है। सौवर्चल नमक

धनतेरस

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  धनतेरस   दीपावली से दो दिन पूर्व   धनतेरस   का त्योहार आता है। इसे धनत्रयोदशी ,  धन्‍वंतरि त्रियोदशी या धन्‍वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि धनतेरस के दिन ही क्षीर सागर के मंथन के दौरान माता लक्ष्‍मी और भगवान कुबेर प्रकट हुए थे। यही वजह है कि इस दिन माता लक्ष्‍मी और भगवान कुबेर की पूजा का विधान है। धनतेरस के दिन मृत्‍यु के देवता यमराज की पूजा भी करते हैं। इस दिन सोने-चाँदी के आभूषण और बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन बाज़ारों में चारों तरफ़ जनसमूह उमड़ पड़ता है। बरतनों की दुकानों पर विशेष साज-सज्जा व भीड़ दिखाई देती है। धनतेरस के दिन बरतन खरीदना शुभ माना जाता है अतैव प्रत्येक परिवार अपनी-अपनी आवश्यकता अनुसार कुछ न कुछ खरीदारी करता है।      इस दिन   तुलसी   या घर के द्वार पर एक दीपक जलाया जाता है। धनतेरस की ख़रीदारी      धनतेरस के दिन नए सामान की ख़रीदारी शुभ मानी जाती है   लेकिन मान्‍यताओं के अनुसार इस दिन      लोगों को कुछ चीजों को खरीदने से बचना चाहिए।     ·               धनतेरस के दिन काले रंग की चीजें नहीं खरीदनी चाहिए। ·               इस दिन

आत्मा (SOUL)

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 आत्मा क्या है ?  क्या आपके मन में कभीं ये सवाल आया है? आया तो होगा, परन्तु इसका जबाब हमें संतुष्ट नहीं कर पता है | शायद ये जबाब आपको संतुष्ट करने में मदद करे  क्या आप जानते है,  ऊर्जा क्या है ? जरुर जानते होंगे, है ना ! यकीन मनिये  जिस दिन आप  ऊर्जा  कि परिभाषा जान गए उस दिन इस सवाल का जवाब भी समझ में आ जायगा | आत्मा :- आत्मा को  ऊर्जा  का रुप मान सकते हैं जो शरीर से दूर होने पर अस्तित्व प्राप्त करती है। आत्मा एक ऐसी ऊर्जा है जो शरीर में प्रवेश करती है और समय आने पर उस शरीर को छोड़कर चली जाती है| और  ऊर्जा     “  आत्मा  को ना तो पैदा किया जा सकता है और ना ही नष्ट किया जा सकता है ,  आत्मा का  केवल एक रूप से दूसरे रूप में रूपांतरण होता है। ” “ ऊर्जा को ना तो उत्पन्न किया जा सकता है और ना ही नष्ट किया जा सकता है , ऊर्जा का केवल एक रूप से दूसरे रूप में रूपांतरण किया जा सकता है। ” आत्मा को संचालित चेतना करती है, और  ऊर्जा  का चेतना से कोई संबध नहीं है | बस यही एक अंतर आत्मा और  ऊर्जा   को अलग करती है, जिससे  आधुनिक विज्ञान समझ नहीं पाता है|   आत्मा और  शरीर  आत्मा के तीन स्वरूप माने गए हैं-

माँ दुर्गा के नौ रूप

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               किस  दिन  किस   मंत्र से करें देवी आराधना माता दुर्गा के 9 रूपों की साधना करने से भिन्न - भिन्न फल प्राप्त होते हैं। कई साधक अलग - अलग तिथियों को जिस देवी की तिथि हैं , उनकी साधना करते हैं। आइए जानें कि हर दिन किस मंत्र से करें देवी आराधना (1) माता शैलपुत्री : प्रतिपदा के दिन इनका पूजन - जप किया जाता है। मूलाधार में ध्यान कर इनके मंत्र को जपते हैं। धन - धान्य - ऐश्वर्य , सौभाग्य - आरोग्य तथा मोक्ष के देने वाली माता मानी गई हैं।   मंत्र - ' ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम : । ' (2) माता ब्रह्मचारिणी : स्वाधिष्ठान चक्र में ध्यान कर इनकी साधना की जाती है। संयम , तप , वैराग्य तथा   विजय प्राप्ति की दायिका हैं। मंत्र - ' ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम : । ' (3) माता चन्द्रघंटा : मणिपुर चक्र में इनका ध्यान किया जाता है। कष्टों से मुक्ति तथा मोक्ष प्राप्ति के लिए इन्हें भजा जाता है। मंत्र - ' ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघंटायै नम : । '